हमारा निर्भय मेवाड़ हितेश सुथार
बरोडा।

रक्षाबंधन का पावन पर्व पूरें देश में हर्सोल्लास एवं पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। बहनों ने इस दिन अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके लंबे जीवन और सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं भाइयों ने अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन दिया। शहर के मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। विशेष रूप से बरोल जी मंदिर मे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जहाँ भगवान बारौलजी को प्रतीकात्मक रूप से राखी बांधी गई। पुजारी समुदाय ने रक्षाबंधन के धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह पर्व केवल भाई-बहन के रिश्तें तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। शहर के सामाजिक संगठनों ने भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में रंगारंग प्रस्तुतियाँ दीं और भाई-बहन के प्रेम पर आधारित नाटक एवं गीत प्रस्तुत किए। डाकघरों और ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से दूर बैठे भाइयों को राखियाँ भेजने का सिलसिला भी जोर-शोर से चला। बाजारों में राखियों, मिठाइयों और उपहारों की खूब बिक्री हुई। इस बार पारंपरिक राखियों के साथ-साथ इको-फ्रेंडली और हस्तनिर्मित राखियों की भी अच्छी मांग रही। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि त्योंहार शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।



