हमारा निर्भय मेवाड़
सलूम्बर। मंगलवार 12 अगस्त
उदयपुर रेंज पुलिस द्वारा रेंज स्तर पर संचालित पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन कार्यक्रम के तहत सलूंबर जिले में किशोर न्याय (बालको की देखरख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत गठित विशेष किशोर पुलिस इकाई/थाना स्तर पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की त्रैमासिक समीक्षा बैठक मंगलवार को नगर परिषद सलूंबर के सभागार में आयोजित हुई। पुलिस अधीक्षक श्री राजेश यादव के निर्देशन में आयोजित इस बैठक में जिले में किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस थानों पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के साथ थाना स्तर पर बालकों से संबंधित मामलों में नए अधिनियम, बाल नशावृति व भिक्षावृति के विरूद्ध थाना स्तरीय अभियानों तथा साइबर क्राइम पर जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बाल संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की गई।
बैठक में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनवारी लाल मीणा ने कहा कि बालकों एवं किशोरों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतते हुए उन्हें सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराए और उनके समग्र विकास के लिए प्रयास करें। उन्होंने बच्चों के मामलों में पोक्सो और जेजे एक्ट में तय गाइडलाइन और निर्धारित प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित व जरूरतमंद बालकों की सतत काउंसलिंग करने और उन्हें आपराधिक प्रवृतियों के दुष्प्रभाव बताते हुए अपराध से दूर रखने, शिक्षा से जोड़ने एवं किशोरों को कौशल विकास से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बाल सुरक्षा कानून विषय तथा बच्चों के विरूद्ध होने वाले अपराधों की प्रभावी रोकथाम, थाना स्तर पर बाल कल्याण अधिकारी/जिला स्तर पर विशेष किशोर इकाई द्वारा की जा रही गतिविधियों, गुमशुदा व अपहृत बच्चों व मानव तस्करी रोकथाम के लिए की गई कार्यवाही पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
इस अवसर पर यूनिसेफ की संभागीय बाल संरक्षण सलाहकार श्रीमती सिंधु बिनुजीत ने रेंज स्तर पर संचालित पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि बालकों का उचित संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने पोक्सो और जेजे एक्ट के प्रावधानों, इसके लिए निर्धारित प्रपत्र और बाल अधिकारों और संबंधित अधिनियमों की जानकारी दी और जरूरतमंद, देखभाल वाले व विधि से संघर्षरत बच्चों के मामलों में कार्यवाही के दौरान बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के लिए निर्धारित नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के भविष्य पर प्रभाव डालने वाली बाल विवाह, बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम जैसी कुरीतियों के साथ साइबर क्राइम और ऑनलाइन अपराधों के बारे में बताते हुए इससे बचने के उपाय भी बताए। बैठक में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों ने अपने कार्य अनुभव साझा करते हुए समय-समय पर विद्यालयों में की गई वत्सल वार्ता एवं जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से साइबर क्राइम, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति आदि की रोकथाम के लिए की गई कार्यवाही और इस संबंध में लोगों को जागरूक करने की जानकारी दी। संवाद के दौरान बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के मामलों में कार्यवाही के दौरान आ रही समस्या के बारे में अवगत कराया कि क्षेत्र में किसी बच्चे के लावारिस हालत या अन्य संदिग्ध स्थिति में मिलने की शिकायत पर पुलिस द्वारा कार्यवाही के दौरान यदि देरी हो जाती है तो बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए उदयपुर जाना पड़ता है और जिले में उपयुक्त आश्रय स्थल नहीं होने पर बच्चों के ठहराव के लिए काफी समस्याओं का समाधान करना पडता है। इस पर यूनिसेफ की बाल संरक्षण सलाहकार सिंधु बिनुजीत ने शीघ्र जिला स्तर पर इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाने हेतु आष्वस्त किया। बैठक में जिले के विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारीयो सहित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कांस्टेबल शैलेन्द्र सिंह, कार्यक्रम टीम के दिलीप सालवी, सुनील व्यास आदि मौजूद रहे।
सलूम्बर जिला मुख्यालय पर विशेष किशोर पुलिस इकाई की समन्वय एवं समीक्षा बैठक का हुआ आयोजन



